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कुछ शेर

माना  के ये जिन्दगी है चार दिन की  बहुत होते है यारों, चार दिन भी  ** जिससे पूछा मैं, के दिल खुश है दुनियां में कहीं ? रो दिया उसने और कहा के, कहते हैं ऐसे  ** साथ में हो तो प्रेम करो  एकांत में हो तो ध्यान करो  ** मई अब भी सोच रहा हूँ के तुम्हारी तरह  बेचकर खुदको ये बाज़ार ख़रीदा होता  ** लायी हयात आये क़ज़ा ले चली चले  अपनी ख़ुशी न आये न अपनी ख़ुशी चले 

Shayari

दर्द-ऐ-दिल लफ़्ज़ों में बयां करते है लोग कहते है, हम शायरी करते है.