लम्हा लम्हा सिसक रही है मेरी जिन्दगी जाने कैसे कहेते है वो खुबसूरत है जिन्दगी *** एक जमाना बित गया, गम ने मुहं मोड़े हुए हमने पेन उठाये हुए, और शेर लिखे हुए *** मैं जब उसके ख्वाब में गया , वो किसी और के ख्वाब में गयी थी या तो ये मेरी तक़दीर का दोष था, या उसके गुस्ताखी की हद थी