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AAi sathi kavita

ओसंडुन उत्साह वाहतो, उत्सव षष्टपूर्तीचा  ! सह परिहार नमितो आम्ही, भाव मनी सत्काराचा  !! झुलते तोरण द्वारी  वेलीचे, पवित्रता भारुनी राही ! नमुनि मंगलमूर्ती पूजिला , सत्यनाथ र्हुदायाठायी  !! तोच जाणता  त्रेलोक्याचा, करता हरता तोच असे ! स्मरता त्यासी येई धाउनी, संकटात हि झेलितसे  !! कसे निर्मिले  चंचल मन हे, चिंतेने व्याकूळ  चित्ति  ! मोकाट सुटे अधिराईने, स्वारी करी वार्या वरती !! आयुष्याचा कण  कण  वेचुनि, रंगवू पाहे नभांगणा ! आली  पराकष्टेची सिमा, काय कसे सांगू कोणा ? गेला प्रातःकाळ  मध्यां:न्ह आता संध्याकाळ आयुष्याचा ! कर्तव्याची  झाली  सांगता, अन फुलला वृक्ष   चंदनाचा !! आशिर्वाद तव झाले पुलकीत, उडे बांगडे स्वच्छंदी ! चिमण  जणू का  इकडून तिकडे चिवचिवति फांदी फांदी !! सुख दुःखाची उनसाऊली, कधी चांदणे पौर्णिमेचे ! लहान मोठ्या जरी बुटयांचे, वस्त्र हे च आयुष्याचे !! दुःखा  नंतर सुख निर्मिले विधी लिखित आहे दोन्ही! सुखदुःखाचे विश्वचक्र हे, चुकून थांबवू नका कोणी !! !! आयुष्...

तन्हाईयाँ

मै अकेला और मेरी तन्हाईयाँ है | तेरी याद से लिपटी तन्हाईयाँ है || मुझे कहाँ ये तन्हा रहेने देती है ? मेरे साथ रहेती तेरी परछाई याँ है | तस्सवुर में भी उनमें में डूब जाता हूँ | अजीब  तेरे आँखों की गहराइयाँ है || तेरे ख़यालों में ही खोया  रहेता हूँ मैं| मेरे दिल को भाती तेरी नादानियाँ है|| तन्हाईयों से क्यूं भागते है लोग ? मुझको लगती प्यारी तन्हाईयाँ है ||  तुषार खेर

कोशिश

तदबीर से तकदीर लिखने की कोशिश कर रहा हूँ अपने आप को तराशने की कोशिश कर रहा हूँ खुदकों दिलके हवाले करने की कोशिश कर रहा हूँ आज फिर इश्क़ तलाशने की कोशिश कर रहा हूँ जो छोड़ गए उन्हे भूलने की कोशिश कर रहा हूँ किसी और को दिलमे बिठाने की कोशिश कर रहा हूँ कण कण में बसे राम; ढूंढने की कोशिश कर रहा हूँ क्या हर दिलमें है राम? जानने की कोशिश कर रहा हूँ दुनियाके लोगोकों समझने की कोशिश कर रहा हूँ इन्सानों में इंसानियत मिले, कोशिश कर रहा हूँ तुषार खेर

तो क्या बात है!

प्रभुके चरणों में ये प्राण निकले तो क्या बात है! दिये  की तरहा अगर  हम जले  तो क्या बात है! जिंदगीभर तूने साथ मेरा दिया है हमदम, पर तेरे हाथों गर कफ़न भी मिले  तो क्या बात है! काली बिल्ली चाहे उसका रास्ता काट जाये, वो अचानक वापस आ जाएं  तो क्या बात है! उसके आने की ख़ुशी में  कहीं  मर न जाऊं यारों थोड़ा रंज-ओ-ग़म भी मिल जाएँ तो क्या बात है! तुषार खेर 

जो तुम्हे दे वो मुझे वरदानमेँ

जो तुम्हे दे वो  मुझे वरदानमेँ मानने लगु मैं भी भगवानमेंं । दिल का रोना कौन देख पाता है आँख टपके तो बात आये ध्यानमें । खंजर छुपाये क्यों घुमते हो दोस्त मांग लेते, तो जान दे देता दानमें । बंदगी में कैसी आई नात -जात क्या फर्क है श्रावण और  रमजानमें? आँख मिचोली मत खेल मौत तू हिम्मत है तो आ आज मैदानमें । याद में तेरी अभी तक जल रहा देख ले आके तू  चिता समशानमें. ! तुषार खेर 

पोपी

कितनी प्यारी सुंदरता है पोपी कि फैली है मीठी सी खुश्बू पोपी कि मेरी जिंदगी का अनमोल तोहफा है पोपी मेरी अँधेरी जिंदगी का उजाला है पोपी पोपी कि प्रशंशा करना आसान नही क्यूँ कि उसको समझना आसान नहीं वसंत ऋतु में जैसे फूल खिले प्यारमें पोपी का चहेरा खिले गुलाबकी पंखुड़ियों से अधर पोपी के काले घने घटा से केसु पोपी के पोपी कि आवाज़ जैसे कोयल कि बोली सिर्फ अपनोसे कर बातें, वर्ना वो अबोली ममता से भरा दिल पोपी का प्यार बाटना काम पोपी का मेरी ईश्वर के चरणो में है यही दुआ पोपी का दामन रहे खुशियों से भरा

एक ग़ज़ल

रोज कहाँ मन के भीतर तरंगे उठ पाती है ! रोज कहाँ कागज़ पे कलम ये चल पाती है !! हवा  के झोकों की तरह याद उसकी आती है पहले की तरह कहाँ वो मेरा साथ दे पाती हैं !! हसते हुए चहेरे हमेशा खूबसूरत लगते है, पर गम में चहेरे पे हसी कहाँ रुक पाती है !! मन की भावनाओं को शब्दों में पिरोना होता है उसके बगैर कहाँ कागज़ पे कलम चल पाती है ? आग में तपने के बाद ही सोना चमक पाता है ये बात तड़पते दिल को  याद कहाँ रह पाती है? तुषार खेर