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खुश रहो

खुश रहो बस खुश रहो! यारों हमेशा खुश रहो !! सुख मिलें या दुःख मिलें  हर हाल में तुम  खुश रहो !! खाने  को पञ्च पकवान  नहीं , दल रोटी में तुम  खुश रहो !! आज यारों का साथ नहीं, तन्हाई में भी  खुश रहो !! आज वो रूठा रूठा  सा है  उसकी इस अदा पे    खुश रहो !!   नहीं मिल पायी तुम्हे प्रियतमा  उसकी यादों में तुम    खुश रहो !! जिसको तुम देख नहीं पाते  उसकी आवाज़  सुनके    खुश रहो !! कल क्या होगा किसको पता?  इसलिए आज में ही    खुश रहो !! जिन्दगी सिर्फ चार दिन की है  इसलिए हर पल में    खुश रहो !!
बरसा पानी  तन में लगी आग  वो नहीं पास     *** न जाने आज की बारिश में क्या बात है  बरस रहा पानी, और तन में लगी आग है        **** बरसा पानी प्यास मिटी धरा की  पर मेरा क्या?

जिंदगानी

  ये  कौन मुझे मेरे होने का भ्रम दे रहा है? ये कौन है जो मेरे बदले, मुझे जी रहा है?                         **  हम उनके लफ्ज़ सुनने को तरसते रहे.  ख़ामोशी सब कहे गई, हम  तरसते रहे.                         **  नहीं चाहिए ए  खूदा, दो पल की ख़ुशी तेरी  दर्द पाके तुझसे, लिखी है ये शायरी मेरी                           ** जागु तो खयालो सी लगे  सोऊ  तो ख्वाब सी लगे  मेरी खुदकी जिंदगानी  मुझको अजनभी सी लगे                           ** एक रास्ता भुलने से मेरी तक़दीर बदल गई  कभी सोची न थी, ऐसी मंझिले मुक्कमल हुई 

त्रिवेणी

                            १  जाते जाते अपना सब कुछ् ले गई , यहाँ तक की सब यादें भी साथ ले  गई पर  गम को साथ ले जाना भूल  गई  !!                       २  स्मार्ट फ़ोन, टेबलेट, लैपटॉप और टीवी है  कार , बंगला और तगड़ा बैंक बैलेंस भी है  इस दिल को  फिर भी  क्यूँ  चैन नहीं है ?

याद

साँसों के चलने  की वजह याद है! मेरे जिन्दा होने की वजह याद है!! हर चीज़ आम है उसकी गलीमें, वहां पैर थमने की वजह याद है! यूँ तो जिन्दगी हो गयी है बेरुखी, चहेरे के मुस्कान की वजह याद है! आँखों की ये चमक बे-वजह नहीं है! उसमें आके बसी तुम्हारी ही याद है! पता नहीं तुम्हे मैं  याद हूँ के नहीं? मेरे दिलमें तो बसी तुम्हारी ही याद है! जुदाई तुम्हारी, मैं  हसके सहे रहा था, आँखों में आये आंसू की वजह याद है !

मेरा यार मिलें !

एक ऐसी श्याम मिले, जब दिल को शुकून मिले! हम जिन्हें याद करें, उनका हमें दीदार मिले! दुःख दर्द की क्या  कमिं है ज़माने में ? कभी सुख के सागर  की लहेरें मिलें ! किया बहुत इंतज़ार  पलकें  बिछायी बार बार  अभ जीना हुआ दुशवार  अब तो मेरा यार मिलें !

हो जाये!

काश कभी कोई सपना  भी  सच  हो जाये! जिसकी तलाश हो, उससे सामना हो जाये! बंद किए बैठा हूँ,  दिल के दरवाजे   मैं  तुम जो आओ, शायद  वो खुले हो जाये ! सुना है हर रात की सुबह होती है  मेरे गम का भी शायद अंत हो जाये ! बरसों  पुराना  दोस्त मिल गया है  तो  शायद कोई पुरानी  याद ताज़ा हो जाये ! संपूर्ण विश्वास  से  तुम उसकी भक्ति करो  तुम्हे शायद भगवान् के दर्शन  हो जाये!  तुषार खेर