दिल में दबाये गम, चहेरे पे झूठी हँसी लिए, अपने आप को छलता रहा, बेदर्द ज़माने के लिए| सूरत-ऐ-आइना काफी था दिदार-ऐ-दिल के लिए, किसने कहा था मियां चहेरे पे चहेरा लगाने के लिए ? चार दिन जवानी के काफी थे दास्तान-ऐ-मुहबत के लिए, क्यूँ मांगी थी दुआ रब से लम्बी जिंदगानी के लिए ? रहेमत परवर दिगार की काफी थी जिन्दगी की राह-ऐ-गुज़र के लिए किसने कहा था मियां, खुद को खुदा समझने के लिए?
जिनकी तसवीरें सिर्फ अखबार में देखते थे वो ही नेता आज मेरे द्वार पे हैं दिखें चुनाव जो है आये जिनको संसद में चुप चाप बैठे हुए देखते थे वो ही नेता स्टेज पर दहाड़ते हुए हैं दिखें चुनाव जो है आये जिनको अब तक जनता को लुटते हुए देखते थे वो ही नेता आज जनता में पैसे लुटाते हुए हैं दिखें चुनाव जो है आये जिनको भ्रष्ट्राचार के दल दल में फसे हुए देखते थे वो ही नेता दूसरों पे कीचड़ उछालते हुए हैं दिखें चुनाव जो है आये जिनको जनता की हर मांग को ठुकराते हुए देखते थे वो ही नेता आज उसी जनता से मत मांगते हुए दिखें चुनाव जो है आये
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