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मुझे दिखें

गैरों में और अपनों में ज्यादा फर्क न दिखें 
जिन्दगी में कुछ ऐसे तजुरबें  है मुझे दिखें 

बहुत दिनों बाद महेफिल में दोस्त पुराने दिखें 
बड़ी मुश्किल् से वो दोस्ती निभाते मुझे दिखें 


'हम ही जीतेंगें' ये  कहेते हुए कई राज नेता दिखें  
जनता से भीख में मत मागते वोही नेता  मुझे दिखें  

महेफिल में कुछ हस्ते हुए खुशनुमा चहेरे दिखें 
अकेले में मगर वोही चहेरे आंसूं बहाते  मुझे दिखें 


बहुतसे बुज़ुर्ग लम्बी जिंदगानी जीते दिखें 
मौत से मिलने को तरसते वो मुझे दिखें 

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चहेरे पे चहेरा

दिल में दबाये गम,  चहेरे पे झूठी हँसी लिए, अपने आप को छलता रहा,  बेदर्द ज़माने के लिए|  सूरत-ऐ-आइना काफी था  दिदार-ऐ-दिल के लिए, किसने कहा था मियां चहेरे पे चहेरा लगाने के लिए ? चार दिन जवानी के काफी थे दास्तान-ऐ-मुहबत के लिए, क्यूँ मांगी थी दुआ रब से लम्बी जिंदगानी के लिए ? रहेमत परवर दिगार की काफी थी  जिन्दगी की राह-ऐ-गुज़र के लिए  किसने कहा था मियां, खुद को खुदा समझने के लिए?

तन्हाईयाँ

मै अकेला और मेरी तन्हाईयाँ है | तेरी याद से लिपटी तन्हाईयाँ है || मुझे कहाँ ये तन्हा रहेने देती है ? मेरे साथ रहेती तेरी परछाई याँ है | तस्सवुर में भी उनमें में डूब जाता हूँ | अजीब  तेरे आँखों की गहराइयाँ है || तेरे ख़यालों में ही खोया  रहेता हूँ मैं| मेरे दिल को भाती तेरी नादानियाँ है|| तन्हाईयों से क्यूं भागते है लोग ? मुझको लगती प्यारी तन्हाईयाँ है ||  तुषार खेर

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